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श्रद्धांजलि../सुनील वर्मा

APJ Abdul Kalam - A Tributeकर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो…

अब तुम्हारे हवाले…वतन….साथियो..!!

“एक फौजी के लिए गर्व की बात होती है कि वह अपने फ़र्ज़ को अंजाम देता हुआ शहीद हो

उसी प्रकार जब एक वैज्ञानिक विज्ञान करते हुए या विज्ञान की बात करते हुए अपनी अंतिम साँस लेता है

तो मैं उसे शहीद का दर्ज़ा देना चाहूँगा।”…

डॉ संजीव कुमार वर्मा..वैज्ञानिक, भारत

भारत रत्न, पूर्व राष्ट्रपति, शहीद, डॉ A P J Abdul Kalam को समर्पित….

मत कहो…कि मर गया हूँ मैं…

मरा नहीं हूँ…

स्थिर हो गया हूँ…बस..

बोल नहीं सकता हूँ तो क्या….

देख सकता हूँ…सुन भी सकता हूँ तुम्हारी बातें…

मत कहो कि मर गया हूँ मै…

क्योंकि जीवित हूँ मै आज भी…!

ध्यान से देखो…

खुले आसमान में…

जुगनुओं से टिमटिमाते…उन सितारों के बीच…

गर्व से गतिमान…

उन ग्रहों…उपग्रहों…में…जीवित हूँ….!

जीवित हूँ…देश की सुरक्षा में…

निरंतर तत्पर …उन मिसाइलो..की हुंकारों में….

घर-घर की चारदीवारियों..में…पलते…

नन्हे उन वैज्ञानिको के… मासूम उन सवालों…में…

सपनो…में…उम्मीदों..में….

आँगन की फुलवारी में जीवित हूँ..!

इस साल जब बसंत आएगा…

तो खिले हुए फूलों को देखना तुम…

उनकी सुगंध में जीवित मिलूँगा तुम्हें…

देखो तो सही…

कि किताब के हर पन्ने तक पर जीवित हूँ मैं…

व्याख्यान कक्षों में…ब्लैक-बोर्ड पर जीवित हूँ…

कर्त्तव्यों का बोझ…

और सपनों का महल…

जो तुम्हें दिया है मैंने…

लगन से संवारना इसे…

उसी लगन के परिणाम में..

जीवित मिलूँगा तुम्हें….क्योंकि…

सपनों के महल के…

साकार स्वरुप में…

हर जगह…हर कदम पर…

जीवित हूँ मैं…

इसीलिए तो कहता हूँ कि…

‘मर गया हूँ’ मत कहो मुझे…

सत्य कहता हूँ…विश्वास करो मेरा…

कि जीवित हूँ मैं…

जीवित हूँ…!!

दिखा गया पथ…सिखा गया…हमको जो सीख सिखानी थी……..

शत-शत नमन

 डॉ.  सुनील कुमार वर्मा, वैज्ञानिक, भारत

 Shraddhanjali-Hindi-Poems-PLEASE-DONT-SAY-I-AM-DEAD-2

 

Tributes

तुमने  पिता खोया है…

और तुमने पति…

मैंने खोया है क्या…

पता है तुम्हे…?

खोया है मैंने…

पिता भी…पति भी…

एक रक्षक…पथ प्रदर्शक…

एक दोस्त भी…मैंने खोया है…!

जानता हूँ मैं….कि…

विलाप तुमने किया था…

किन्तु हूक जो उठ रही है…

वो मेरे दिल की आवाज है…सुनो तुम…

तुम ही रोई थी…आंसू भी बहाए थे तुम्ही ने…

किन्तु जख्म मेरी आँखों के…

आज भी हरे हैं…!

आह भी नहीं भर सकता हूँ…

रो भी नहीं सकता…

हाँ पुत्र बन कभी…कि कभी पुत्री…

या कि बनकर जीवन संगिनी उसकी…

कभी शिष्य…

तो कभी दोस्त बनकर…

भावनाओं की श्रद्धांजलि जरुर दे सकता हूँ उसे…

यही मेरे प्यार के श्रद्धा सुमन हैं…!!

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Tributes by

डॉ.  सुनील कुमार वर्मा, वैज्ञानिक

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Sri Rajkumar Verma (1951 – 24 March 2014)

Mere_Papaji

Sri Rajkumar Verma (1951-24 March 2014)

 

My father, vaidya Sri Raj Kumar Verma was born and brought up in the village Tikri of then district Meerut of Uttar Pradesh. My grand father and his father Sri Rambhajan Verma was a religious man and used to do the traditional work of gold and silver ornament making. My father Sri Raj Kumar Verma did his primary and school education in the village and then was admitted for the Vaidya Vishrad Ayurved Ratna course at Allahabad. He was married to my mother Smt. Krishna Verma, a religious lady. Later, he opened a small ayurveda clinic in the village and also a small phamacy to serve the villagers, who were deprived of such facilities in the village. Some times in 2000, Sri Verma moved to Delhi along with his family and lived there until his last breath. He peacefully left the world on 24th March 2014. He left three sons behind him and two daughters. Two of his sons are scientists and both of his daughters are teachers in government schools in Uttar Pradesh.

Raj Kumar Verma Ji was an extra ordinary man of immense knowledge of ayurveda. He was an extremely hard working person whom no one ever seen sitting ideal. He used to read, write and remain busy with his patients for whole day till 11 pm in the night and worked till the last day of his life on this earth.

I have cited his teachings to me at several occasions as follows:

It is known that several people die due to ‘not working’ enough and becoming unhealthy but no one on earth had died due to working hard!

Sri (Dr.) Raj Kumar Verma

Sri Raj Kumar Verma Ji is no more with his body, but his thoughts and his life time work and selfless services to his patients whom he treated with his knowledge of Ayurveda will remain in this world!

May God bless and rest his soul in peace!

Dr Sunil Kumar Verma, Son of Sri Raj Kumar Verma

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  • A Tribute by: Dr S K Verma  ·  Filed under:
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