अभी आ जाएगा वो/सुनील वर्मा

घिर आई है साँझ…

घरों को लौटते पंछियों के साथ..

अभी आ जाएगा वो…!

किताबों का बोझ लिए…

मैंने भी सोच लिया है…

कि कह ही दूंगी आज…कि…

किया नहीं जाता तुम्हारा इंतज़ार…!

कुछ नहीं खाया हमनें…

तुम्हारी मनपसंद खीर सुबक-सुबक कर सो गयी बच्ची सी…

शांत पड़ी है…ठंडी हो गयी है…

जाओ मना लो उसे…

किचन में है जगा लेना…

सोच लिया है मैंने…कहना ही तो है…कि…

तुम्हारे हाथों की किताबे यें…

सौतन बन गयी है मेरी…!

इन्हीं से चिपके रहना…हमारा क्या है….!

जानती हूँ मैं..कि कुछ नहीं होगा…

कुछ भी नहीं…!

उसी चिर परिचित अंदाज़ में…

धीरे से मुस्कुराएगा वो…और बंद हो जायेगा…

उन्हीं किताबों के साथ…

यही होगा…बिलकुल यही…

फिर भी कहना है सब कुछ…

तुम्हीं कहो…

कि कैसे तोड़ दूं…हर रोज का क्रम….!

क्यों ना करूँ इंतज़ार…

क्यों ना सुनू..घरों को लौट आते पंछियों का कलरव…

और उनके बच्चों की चूं…चूं..चीं..चीं..?

क्यों ना विनती करूं…ढलते इस सूर्य से…

कि चले तो जाना तुम…क्षितिज़ में कहीं…

किन्तु उसे भेज देना…

जाने से पहले…

हर रोज़ की तरह…

मेरा क्या है…

किताबों से दूर…हवाओं के गीतों में मस्त..

गुनगुनाते हुए उसको…

कैनवास पर उतार लूंगी…

अंग-अंग में उसके…

कल्पना का रंग भर लूंगी मैं…

संतृप्त हो जाऊँगी…

किन्तु उसको समझाऊँ कैसे…

जो बेटी है उसकी…!

और उस बेटी को…

कैनवास पर उतरे पापा नहीं..

पापा चाहिए…वही पापा…

जो आते हैं हर रोज़…

निशा के अंधेरों से पहले..

घरों को लौटते पंछियों के साथ…!

वही पापा चाहिए उसे…

जिन्हें तूलिका नहीं भाती…

हवाओं के गीत…गुनगुनाना तो दूर…

सुनना भी नहीं आता जिनको…!

वही किताबों से चिपके पापा…

वही ख्यालों में गुमसुम…वही चुपचाप…

यदा-कदा ही मुस्कुराते पापा…!

वही गंभीर चेहरा लिए…

ना जानें किसकी तलाश में…बेचैन से पापा…!

डैडी कहकर…

उन्हीं से चिपक जाना चाहती है वो….

नहीं चाहिए उसे…

मेरी कल्पनाओं के रंग में रंगे…

किताबों से दूर…

हवाओं के गीत गुनगुनाते…

कैनवास पर उतरे पापा…!

और इसीलिए तो…तुमसे ऐ! रवि…

विनती करती हूँ…

कि क्षितिज़ में छिप जाना कहीं…

जरुर छिप जाना…

किन्तु आने तक उसके…रुक जाना तुम…!

और विश्वास है मुझे…

कि आयेगा वो…

जरुर आयेगा…

वही सौतन किताबें लिए…

उसी चिर-परिचित अंदाज़ में…

धीरे से मुस्कुराएगा…

और बंद हो जायेगा…

किसी कमरे में चुपचाप..

किताबों के साथ…!!


Shraddhanjali-Hindi-Poems

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