श्रद्धांजलि../सुनील वर्मा

 तुमने  पिता खोया है…

और तुमने पति…

मैंने खोया है क्या…

पता है तुम्हे…?

खोया है मैंने…

पिता भी…पति भी…

एक रक्षक…पथ प्रदर्शक…

एक दोस्त भी…मैंने खोया है…!

जानता हूँ मैं….कि…

विलाप तुमने किया था…

किन्तु हूक जो उठ रही है…

वो मेरे दिल की आवाज है…सुनो तुम…

तुम ही रोई थी…आंसू भी बहाए थे तुम्ही ने…

किन्तु जख्म मेरी आँखों के…

आज भी हरे हैं…!

आह भी नहीं भर सकता हूँ…

रो भी नहीं सकता…

हाँ पुत्र बन कभी…कि कभी पुत्री…

या कि बनकर जीवन संगिनी उसकी…

कभी शिष्य…

तो कभी दोस्त बनकर…

भावनाओं की श्रद्धांजलि जरुर दे सकता हूँ उसे…

यही मेरे प्यार के श्रद्धा सुमन हैं…!!

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Tributes by

डॉ.  सुनील कुमार वर्मा, वैज्ञानिक

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The Discussion

3 Comments on श्रद्धांजलि../सुनील वर्मा

  1. baban pandey says:

    खोते है उनका शरीर …उनकी आत्मा तो हमें देख रही है …राह दिखाते रहो ..

  2. Lalit Sharma says:

    wo kahne ko to chale gye par unke aashirwad aaj b aapke sath h. apno ki yadon ko sanjoye rakhe unka statue banwakar. sampark kre shakshimoorti@gmail.com pe

  3. Manoj Kumar Jaiswal says:

    संजोएं हैं हमने,
    तुम्हारीं यादें ,
    दिल के किसी कोने से
    झांकती हैं
    दस्तक देती हैं उन यादों को
    कभी हँसातीं, कभी रुलाती,
    प्यार के पलों में भीगीं यादें !!!!!!!
    दे जाती है दर्द,
    सहना है
    पर
    रहना है उन्ही यादों के साथ
    सदा ,

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