आत्मा का रिश्ता है ये/सुनील वर्मा

तुमसे खून का नहीं…

आत्मा का रिश्ता है मेरा…

कोई भी नाम नहीं…

अनाम है ये रिश्ता…अनमोल भी है…

जानते हो तुम…

फिर भी…रुठ जाते हो…हमसे….

मौन हो जाते हो…

रूठ जाना तुम्हारा…या कि मौन हो जाना…

जानते नहीं हो तुम शायद…

कि कितना रुलाता है हमें…

क्या बताएं उन्हें…

रिश्तों का प्रमाण मांगते हैं जो…

रोने भी नहीं देते हमें…!

और तुम हो कि…

रुलाते हो बेज़ार…!

नही करेंगे शिकवा,

नहीं करेंगे शिकायत..

किन्तु आकर समझा जाओ उनको …

रिश्तों का प्रमाण मांगते है जो

रोने भी नहीं देते हमें…!

और बता जाओ उनको

कि…खून का नहीं…

आत्मा का रिश्ता है ये…

जो खून के रिश्तों सा ही…

पवित्र होता है…!!


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