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मत कहो…कि मर गया हूँ मैं/सुनील वर्मा

मत कहो…कि मर गया हूँ मैं…

मरा नहीं हूँ…

स्थिर हो गया हूँ…

बोल नहीं सकता हूँ बस…

देख सकता हूँ…सुन भी सकता हूँ तुम्हारी बातें…

मत कहो कि मर गया हूँ मै…

क्योकि मैं जीवित हूँ आज भी…!

ध्यान से देखो…

घर की इन दीवारों में जीवित हूँ…

जीवित हूँ…आँगन की फुलवारी में…!

इस साल जब बसंत आएगा…

तो खिले हुए फूलों को देखना तुम…

उनकी सुगंध में जीवित मिलूँगा तुम्हें…

देखो तो सही…

कि किताब के हर पन्ने तक पर जीवित हूँ मैं…

व्याख्यान कक्षों में…ब्लैक-बोर्ड पर जीवित हूँ…

कर्त्तव्यों का बोझ…

और सपनों का महल…

जो तुम्हें दिया है मैंने…

लगन से संवारना इसे…

उसी लगन के परिणाम में..

जीवित मिलूँगा तुम्हें….क्योंकि…

सपनों के महल के…

साकार स्वरुप में…

हर जगह…हर कदम पर…

जीवित हूँ मैं…

इसीलिए तो कहता हूँ कि…

‘मर गया हूँ’ मत कहो मुझे…

सत्य कहता हूँ…विश्वास करो मेरा…

कि जीवित हूँ मैं…

जीवित हूँ…!!


Shraddhanjali-Hindi-Poems-PLEASE-DONT-SAY-I-AM-DEAD-2

‘Shraddhanjali’ is a collection of the tribute poems written by

 Dr Sunil Kumar Verma

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